पढ़ने की आदत बचपन से ही लगी, थैंक्स टू हमारे दोनें चाचाजी, जिन्हें प्यार से हम मंझले और छोटे पापा कहते हैं. और कलकत्ते में रहने वाला पढ़ाकू बालक जनवरी-फरवरी के पुस्तक मेले से अनभिज्ञ रह सकता है भला? बरसों तक हर बरस कलकत्ते के प्रचण्ड पुस्तक मेला, उर्...
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