सप्रेम प्रणाम गौरव। कुछ कारणों से whatsapp हटाना पड़ा है, लेकिन तुम से किए वादे को निभाने के लिए, यहां अपनी टिप्पणी लिख रही हूं। यह कविता पढ़ी, बहुत अच्छी लगी। कविता का आधार, या यूं कहूं कि कविता का उद्देश्य - कर्म का अर्थ समझाना, बहुत ही सूक्ष्म और सरल प्रतीत हुआ। भाषा के विषय में कहूं तो, यद्यपि भाषा मानक एवं शुद्ध हिन्दी के निकट है, और शब्दावली में भी यही ध्यान रखा गया है, कविता में एक सरलता बन पाई है, पढ़ने में कहीं कठनाई की अनुभूति नहीं हुई। कविता के विषय का इतना सघन विवेचन और व्यवहारिक जीवन से लिए उदहारण एवं युक्तियां कविता को रूचिपूर्ण बनाने में सक्षम रहे हैं। अभी उस स्तर पर स्वयं को नहीं समझती कि आलोचना कर सकूं, न ही मेरी हिंदी भाषा उतनी स्वाभाविक है, यदि कोई अशुद्धियां हो तो, कृपया बताना;
धन्यवाद इस कविता को पढ़ने का अवसर प्रदान करने हेतु।